बजाङ-बाजुरा 12:31 PM जनयुध्दे गन्ध .........फुटेका चुराहरु गाँस-वास-कपास ...भेटीका कुराहरु कछुवा समकक्षी वेखबर छ कान्तिपूर, भोको 'सोमालिया' बजाङ-बाजुराहरु ! Labels: छेस्का, मुक्तक, साहित्य
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