#झ्याउँकिरि
8:45 PM
किरी-किरी
झ्याउँकिरि
कराउँछे!!
हो-हल्ला रहित-
सहित
गुन्जायमान
वनहरु
नाचे सरि
पातहरु
फिरी-फिरी!
किरी-किरी
झ्याउँकिरि!!! :)
Labels: कविता, टुक्रा-टाक्री, साहित्य
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